Thursday, 5 January 2017

श्री लटूरी लट्ठ जी के साथ साक्षात्कार





हमारा  सौभाग्य है कि हमें अपने संस्थान अटल बिहारी वाजपेयी-भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी एवं प्रबंधन संस्थान,ग्वालियर में आयोजित कवि सम्मेलन में कविता पाठ करने वाले सुप्रसिद्ध हास्य कवि लटूरी लट्ठ जी का साक्षात्कार करने का अवसर मिला। आपके समक्ष प्रस्तुत है साक्षात्कार के संक्षिप्त अंश-

प्रश्न- आपके जीवन में कोई ऐसी घटना जिससे आप कविता पाठ अथवा कविता लेखन कि तरफ आकर्षित हो गए?

लठ्ठ जी- हमारे जीवन में ऐसी कोई विशेष घटना तो नई हुई लेकिन मेरी दादी मेरे जीवन की प्रेरणा थी। मैंने उनसे जीवन में सदा प्रसन्न रहना सीखा, पर समय हमेशा एक सा नई रहता। जीवन की अंतिम अवस्था में दादी का स्वास्थ्य अचानक बहुत गिर गया। उनका इलाज कराने मैं उन्हें एक अस्पताल ले गया जहाँ मैंने देखा की दुनिया में हर तरफ दुःख ही दुःख है, तब मैंने सोच लिया कि अब मैं लोगों को हँसाने का ही काम करूँगा।


प्रश्न-  महोदय आपके विचार से कविता क्या है? ऐसी क्या खासियत होती है कवियों में जो हर एक परिस्थिति या घटना को अलग नजरिये से देखता है?

लठ्ठ जी कविता तो प्रत्येक व्यक्ति के अंदर होती है। एक बड़े कवि ने कहा है कि कविता में का अर्थ है कल्पना, वि का अर्थ है विचार तथा ता का अर्थ है तालमेल। इसका तात्पर्य यह है कि विचार और कल्पना के तालमेल से ही कविता की उत्पत्ति होती है। कवियों के पास विचार और कल्पना का अद्भुत तालमेल होता जबकि किसी अन्य व्यक्ति के विचार अलग होते है और कल्पना अलग।मेरे अनुसार कवि हर एक चीज़ को अलग तरह से देख पता है क्योंकि उनके पास ईश्वरीय वरदान होता है। या इसे अलग तरह से भी कह सकते है कि साहित्य ईश्वर की देन है।


प्रश्नआपके कविता पाठ अथवा लेखन की शैली क्या है?

लठ्ठ जीमैं तो हास्य रस का कवि हूँ और लोगों को हँसाना जानता हूँ। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग हताश और निराश है, अगर वे मेरे प्रयास से थोड़ी देर भी अपना दुःख भूल जाते है तो मैं अपने आप को धन्य समझूंगा।


प्रश्न- अब तक का  आपका सफ़र कैसा रहा?

लठ्ठ जीजब मैंने कविता लेखन/पाठन का कार्य शुरू किया तब सब कुछ बहुत विस्मयकारी लगता था। पता ही नहीं था की जीवन किस दिशा में आगे बढ़ रहा , पर अब तो सारा जगत एक परिवार जैसा लगता है।
अब सब कुछ सहज प्रतीत होता है।  हम अपने कार्य से प्रसन्न और संतुष्ट भी है।


प्रश्न- वर्तमान समय की युवा पीढ़ी को आपका क्या सन्देश है?

लठ्ठ जी-   “सफलता उनको मिलती है जो मन में ठान लेते है
               बड़ों की बात सुनते है उन्हें फिर मान लेते है,
               बुलंदियां उन्हीं के कदम चूमती है,जो वक्त पहचान लेते है।
मैं तो इन्हीं पंक्तियों से आजकल की युवा पीढ़ी को शिक्षा देना चाहूँगा पर युवा पीढ़ी एक बात समझ ले कि साहित्य, समाज का दर्पण होता है और साहित्य समाज की जरूरत भी है, इसलिए हर समाज साहित्य के बिना अधूरा होता है। इसलिए प्रत्येक युवा को साहित्य के विकास लिए प्रयास अवश्य करना चाहिए।


संवाददाता- आर्यन सचाननिधि त्रिपाठी
फोटोग्राफर- आयुषी रस्तौगी

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